तनाव कम कैसे करें

Author: 
Jaipal Singh Rathore

Jaipal Singh Rathore began his career with Indian Railways. After three years he joined the Department of Customs & Central Excise. After serving for 21 years, Shri Rathore took voluntary retirement as Superintendent in the Department. Presently he is the Head of Corporate Affairs with a reputed public limited company. Shri Rathore is also a prolific writer on a variety of subjects including Philosophy of Life.

यह सच है कि हम में से हर कोई जीवन के किसी न किसी चरण में या पड़ाव पर तनाव का सामना अवश्य करते हैं. तनाव या Stress के कई कारण हो सकते हैं. अपने कैरियर की चिंता, दोस्तों की नाराजगी, नौकरी, धन, बिजनेस, गर्लफ्रेंड, आदि आदि, यह भी जरुरी है कि हमें तनाव को झेलने या फिर उससे बचने का तरीका भी मालूम होना चाहिए अन्यथा इसके कई बुरे परिणाम भी हो सकते हैं, कहते हैं तनाव चिंता को जन्म देता है और चिंता तो चिता के समान होती है, इसके हमारे शरीर पर कई कुप्रभाव हो सकते हैं ।

 
Stress management
 

सदा हंसमुख रहनेवाला, हमेशा भाग-भाग कर दूसरों कि मदद करने वाला, बड़े से बड़े काम को चुटकियों में क़रने वाला, राजस्थान जैसी वीरों की भूमि, गांव की पृष्ठभूमि और मुश्किलों को जेब में रखने वाले मुझ जैसे जीवठ एवं कर्म प्रधान व्यक्ति के जीवन में भी एक ऐसा दौर आया जब छोटी - छोटी बातों से तनाव होने लगा फिर चाहे वो ऑफिस की बाते हो या फिर किसी साथी का अभद्र व्यवहार या फिर बॉस की डांट और परिणाम स्वरुप रात सोचते सोचते करवटो में ही निकलती थी और अगला दिन पूरा आलस , सुस्ती और चिड़चिड़ेपन में ही निकलता था, घर वालों के साथ भी हर बात में गुस्सा करना और झल्लाना एक आदत सी बन गई थी, फिर रात को कभी-कभी दो - तीन ड्रिंक भी ले लेता था उससे समस्या और गहरा गई और मुझे ऐसा लगने लगा कि कहीं मुझे depression नामक बीमारी तो नहीं हो गई ।

उसी समय अचानक मेरे एक निर्णय के कारण मेरी ट्रांसफर दो वर्ष के बाद वापस अहमदाबाद होनी थी वो नहीं हुई और चार वर्ष के लिए घर से दूर रहना पड़ रहा था, जैसे जैसे सभी साथी वापस लौटने लगे वैसे वैसे मुझे लगने लगा कि मैं तो अकेला रह गया और अब मेरा क्या होगा, यह सोचकर रातो की नींद उड़ गई, यही बात मैंने मेरे सीनियर से कही तो वो निकले नीम हकीम, मेरी हाथ की नब्ज देख कर बोले मामला गड़बड़ है और तत्काल मुझे राजकोट अस्पताल ले गए और कहा की इनका bp high है आप इन्हें भर्ती कर ले, डाक्टर ने सभी प्राथमिक जांच की और पाया कि सब कुछ तो नॉर्मल है लेकिन मेरे बार बार ये कहने पर कि मुझे नींद नहीं आती तो उन्होंने पांच दिन का कोर्स दे दिया जिसमे और कुछ नहीं नींद की तीन गोली रोज़ खानी थी । 

वो नींद की गोलियां मेरी मुसीबत बन के आईं क्योंकि अब यह डर सताने लगा कि गोली लेने के बाद भी नींद नहीं आईं तो...हालत पागलों जैसी होने लगी, जिस रात नशा कर लूं उस रात नींद आ जाए लेकिन आधी रात को फिर विचार मंथन चालू ।

अंततः मैंने खुद अपने आप से पूछा कि यह क्या हो रहा है मेरे साथ, अपने सर्किल में हमेशा एक brave और leader की इमेज रखने वाले के साथ ये क्या हो रहा है...तत्काल बात समझ में आ गई कि ये सब नींद की गोलियो का कमाल है, तत्काल उन्हें फेंकी और सुबह उठकर मेडिटेशन करना चालू किया, sister Shivani के कार्यक्रम देखने लगा उससे नई ऊर्जा का संचार और एक नई दिशादृष्टी दिखी जिसपर अमल करना चालू किया और कुछ ही समय में चेहरे पर चमक, रात्रि निंद्रा और हल्कापन ज़िंदगी में लौट आया ।
 
उसके बाद यह decide किया कि :

1. रात्रि खाना हल्का और सोने से दो घंटे पहले होना चाहिए, समय पर सोए, tv देखने के तुरंत बाद नहीं सोए बल्कि थोड़ा सा मेडिटेशन करें ताकि अन्तर्मन में कोई नेगेटिविटी नहीं जाए, सुबह जल्दी उठने का प्रयास करे, फ्रेश वातावरण में थोड़ा सा मेडिटेशन करें फिर घूमने निकल जाए ताकि शुद्ध हवा आपका तन - मन आनंदित करदे और पूरा दिन एक अलग खुशी और आनंद में व्यतीत होगा ।

2. पर्याप्त नींद लें : यह बहुत महत्वपूर्ण है, रोज रात में पर्याप्त नींद लेनी चाहिए, रोज 7-8 घंटे सोना चाहिए, यदि नींद पूरी नहीं करते तो अगला दिन पूरे दिन तनाव ग्रस्त रहोगे, छोटी छोटी बातों पर चिढ जायेंगे और अपने काम पर ध्यान केन्द्रित नहीं कर सकेंगे, नींद को प्रभावित करने वाली चीजों जैसे कैफीन या मीठी चीजों से खासकर रात में दूर रहें, एक सामान्य व्यक्ति को प्रतिदिन कम से कम 7 घंटे नींद लेनी चाहिए ।

3. अपने अगले दिन की योजना पहले से बनाएं: जब आप रात को सोने जायें तो अगले दिन की योजना बना लें, इसे आप एक कागज पर या फिर मोबाइल के नोट्स में लिख लें कि अमुक अमुक काम कल करना है और उसे कैसे handle करना है, अपने कार्य योजना के अनुरूप करें क्योंकि जब हमारा कोई काम समय पर नहीं होता या फिर हमसे चूक होती है तो वह Stress को जन्म देती है ।

4. दिल खोल कर हंसिए : हँसी तनाव कम करने के लिए एक बेहतर तरीका है, अधिकांश लोग जीवन में इतना सीरियस हो जा जाते हैं कि वे हँसना भूल जाते हैं । आप हँसे और हंसने का कोई भी मौका न चूकें, हंसी एक दवा है जिसके लिए पैसे नहीं खर्च करने पड़ते, कोई कॉमेडी शो देखे, कोई चुटकलो की पुस्तक पढ़ें, कहा गया है कि हँसी का 1 मिनट 15 मिनट व्यायाम करने के बराबर होता है.

औरों को हँसते देखो
हंसो और सुख पाओ ।
अपने मन को विस्तृत कर लो
सबको सुखी बनाओ ।।

- जयपाल सिंह राठौड़

Comments

बहुत सुंदर

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